प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने कोलकाता स्थित आई-पैक दफ्तर और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर हुई रेड के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और उधर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने भी कैविएट लगायी है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संविधान के आर्टिकल 32 का सहारा लिया है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाए हैं कि मुख्यमंत्री ने खुद रेड वाली जगह पर घुसकर अहम सबूतों और दस्तावेजों को वहां से हटाया है। उन्होंने बंगाल की पुलिस पर भी जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
आर्टिकल 32 के तहत कोई भी नागरिक या संस्था मौलिक अधिकारों के हनन पर सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकती है और ईडी ने दावा किया है कि बंगाल में उसकी निष्पक्ष जांच करने की आजादी छीन ली गई है। एजेंसी का कहना है कि राज्य की मशीनरी ने कानून का उल्लंघन किया है। पुलिस ने ईडी अधिकारियों को उनकी शक्ति का उपयोग करने से रोका है।
ईडी ने अपनी 28 पन्नों की याचिका में दावा किया है कि प्रतीक जैन के घर पर रेड के दौरान ममता बनर्जी वहां पहुंची थीं और उन्होंने वहां से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कागज अपने कब्जे में ले लिए। ईडी के अनुसार ये सबूत कोयला घोटाले की मनी ट्रेल को साबित करने के लिए बेहद जरूरी थे। एजेंसी ने ममता बनर्जी के इस कदम को जांच में सीधा दखल बताया है।
उधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले ही वहां ‘कैविएट‘ दाखिल कर दी, जिसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट बंगाल सरकार का पक्ष सुने बिना कोई आदेश नहीं देगा। कैविएट एकतरफा कार्रवाई को रोकने के लिए लगाई जाती है। बंगाल सरकार चाहती है कि एजेंसी के दावों पर कोई भी फैसला आने से पहले उनका पक्ष सुना जाए। यह कूटनीतिक और कानूनी लड़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कोयला घोटाले की बड़ी रकम एक विशेष कोल कंपनी को भेजी गई। यह कंपनी राजनीतिक सलाहकार फर्म आई-पैक से जुड़ी बताई जा रही है।
ईडी सबसे पहले इस मामले को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट गई थी। वहां एजेंसी ने पुलिस की भूमिका और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की शिकायत की थी लेकिन शुक्रवार को कोर्ट में वकीलों के भारी हंगामे के कारण माहौल खराब हो गया। इस हंगामे की वजह से हाईकोर्ट ने सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी।
ईडी ने अपनी याचिका में पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की माँग की है। ईडी का आरोप है कि राज्य पुलिस और प्रशासन के रहते निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भी आई-पैक पर रेड के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन किया है।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)